Tuesday, 21 January 2020

New best shayarn

new best shayari

मेरे खातिर दुनिया की महफिल नहीं वहाँ पे मैं नहीं, जहाँ पे दिल नहीं इश्क सच्चा हो तो वो तमाशा क्यूँ बने दर्द ऐसा नुमाइश के काबिल नहीं आज की रात तू मेरे पहलू में नहीं चाँद से आज कुछ भी हासिल नहीं

सारा गुनाह इश्क़ का, उसपे ही डाल दो मुज़रिम उसे बनाकर मुसीबत को ताल दो ये चमन जहाँ खिला एक फूल मुस्कुराता उसे तोड़कर रकीबों की तरफ उछाल दो .

इश्क़ पर ज़ोर नहीं, यह वो आतिश ग़ालिब; के लगाए ना लगे और बुझाए ना बुझे।

इश्क के रिश्ते कितने अजीब होते है? दूर रहकर भी कितने करीब होते है; मेरी बर्बादी का गम न करो; ये तो अपने अपने नसीब होते हैं!

इश्क की बेमिसाल मूरत हो आप, मेरी ज़िंदगी की एक ज़रूरत हो आप, फूल तो बहोत प्यारे होते ही हे, पर फूलो से भी बहोत खूबसूरत हो आप.

 ना इश्क़ का इज़हार किया, ना ठुकरा सके हमें वो; हम तमाम ज़िंदगी मज़लूम रहे, उनके वादा मोहब्बत के।     

 इश्क़ की बंदगी दी है तो हुस्न की इबादत जरूरी है; इश्क़ से जीने की आस रहेगी और हुस्न से तड़प का सकून​।

इश्क़ मे उनके जान देके , हम भी दिखा देते मगर , तभी याद आया की, मोहब्बत तो आँधी होती है .

किताब-ए-इश्क़ में जीतने अल्फ़ाज़ लिखे हैं, दिल में मेरे उठने एहसास रखे हैं. तुम कह-कर देखते सितंगर, ज़ालिम   मेरे लबों पर कितने तेरे नाम रखे हैं.

 शिद्दत - ए - दिल का आलम तो देखिए, क्या दिखे सितारे ज़रा चाँद तो देखिए    सुकून - ए - ज़िंदगी में ना मिला कभी, इश्क़ क्या करते ज़रा आशिक को देखिए    रास्तो से सामना ना हुआ ” मसरूर” क्या मिलते अपने ज़रा मुसाफिर को देखिए     

तेरे इश्क का बुखार है मुझको; और हर चीज खाने की मनाही है; एक हुस्न के हकीम ने सिर्फ; तेरे चमन की मौसमी बताई है।

  राहे-दूरे-इश्क़ से रोता है क्या​;​​ ​​ आगे-आगे देखिए होता है क्या​​;  ​​​​ सब्ज़ होती ही नहीं ये सरज़मीं​;​ ​​​ तुख़्मे-ख़्वाहिश दिल में तू बोता है क्या​​;  ​​​​ क़ाफ़िले में सुबह के इक शोर है​;​​ ​​ यानी ग़ाफ़िल हम चले सोता है क्या​​;  ​​​​ ग़ैरते-युसुफ़ है ये वक़्ते-अज़ीज़​;​ ​​​ मीर इसको रायगाँ खोता है क्या​।

इश्क़ क़ातिल से भी, मक़तूल से हमदर्दी भी; यह बता किस से मोहब्बत की जज़ा माँगे गा; सजदा खालिक़ को भी, इब्लीस से याराना भी; हश्र में किस से अक़ीदत का सिला माँगे गा!

 इतना प्यार ना कर के इश्क़ भी, रो पड़ेगा तेरी वफ़ा देख कर, तुम मिलो ना मिलो पर, रब ज़रूर जल उठेगा, तुम्हारा जुनून देख कर  .

 जुनून ए इश्क़, नही रास आया हमें, जब भी देखा आईना, अक्स उनका ही नज़र आया हमें, तड़पते दिल के ब्यान करें कैसे ? जब भी कुरेड़ा घाव को, दर्द उनका ही उभर आया  .

 इश्क़ छुपता है छुपाने से कहाँ, यह खुद बे खुद सामने आता है, नही बचता इस से कोई भी कभी, यह सब को ही बड़ा तड़पता है 

 यह रोग इश्क़ का बहुत बुरा है दोस्तो, आप इस रोग से खुद को बचा लेना, अगर हँसी कोई नज़रें मिलना भी चहाए, तो आप नज़रों को अपनी हटा लेना 

 तेरे साथ इतने बहुत से दिन, तो पलक झपकते गुजर गये, हुई शाम खेल ही खेल में, गयी रात बात ही बात में, कोई इश्क़ है के अकेला, रेत जी शाल ओढ़ के चल दिया,
 अभी तो दूर तक साथ साथ चलना है, वैसे हैं हमसफर पर चलती उनकी आनबान भी, साथ हरदम नहीं रह सकते चाहने वाले, इश्क़ के साथ दर्द भी, भारी बरसात बादलों ने दे दिया दॉखा, सुखी नदियो के साथ प्यासे उजड़े उपवन भी, हुस्न मासूम है और सूरतें भोली भली, टूट जाते हैं कभी दिल भी और दर्पण भी 

 इश्क़ कैसे होता है..इश्क़ किसको कहते है तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना

 मेरी दुनिया में आया एक मुसाफिर ऐसे, कोई पहले की जान पहचान हो जैसे..    मिले हम उनसे और वो हुमसे कुछ इस तरहा से, कोई बरसों से बिछड़े हुए हों जैसे..    दिल में प्यार फिर इश्क़ उतरा कुछ ऐसे, और कोई ज़िंदगी में गुंजाइश ना हो जैसे..    बता दो आए मुसाफिर जाना कहाँ हैं वैसे, अकेले ये सफ़र तय करोगे तुम कैसे..    मिल गये हो तो अब रहना कुच्छ इस तरहा से, की साए भी एक से हो जाएँ जैसे..    दो मंज़िलें बन जायें अब एक ऐसे, खुदा ने कोई दुआ क़बूल कर दी हो जैसे ...!!

 एहसास के दामन मे कभी आँसू गिरा के देखो, इश्क़ कितना सच्चा हे कभी आज़मा कर देखो. मोहब्बत को भूल कर क्या होगी दिल की हालत, कभी कोई आईने को ज़मीन पर गिरा कर देखो.

 हर शख्स से उलफत का इक़रार नही होता...!!    हर चेहरे से दिल को कभी प्यार नही होता...!!    जो रूह को छ्छू जाए, जो दिल मे उतार जाए...!!    उस इश्क़ का लफ़्ज़ों में इज़हार नही होता...

 इश्क़ करते हो जिनको उसको आज़ाद करदो, इश्क़ को तोलने का तरज़ू नही हे, इश्क़ का मारा आशिक़ खिछा चला आएगा, अगर नही आया तो समजना के वो किसी और का हे.

 आँखो मे आँसू से आ जाते हे, फिर भी लबो पर हसी रखनी पड़ती हे, ये इश्क़ भी क्या चीज़ हे दोस्तो, जिसे इश्क़ करते हे उसी से हे छुपानी पड़ती हे.

 मत ज़िक्र करो अपने अदा के बारे मे, हम भी बहोत जानते हे वफ़ा के बारे मे, हमने सुना हे उन्हे भी इश्क़ का नशा छाया हे, जो नही जानते कुछ भी वफ़ा के बारे मे.

 इश्क़ की वो मेरी इंतेहा पूछते हे, दिल मे जो ये प्यार हे,वो जगह पूछते हे, अपने आप से भी ज़्यादा चाहते हे हम उनको, पर ये इश्क़ की भी वो वजह पूछते हे.

 जिसे तुम इश्क़ करो वो मोहब्बत जो तुम्हे इश्क़ करे उस का क्या..?    जिसके लिए तुम रोए वो मोहब्बत जो तुम्हारे लिए रोए उसका क्या..?    जिसके लिए तुम तड़पे वो मोहब्बत जो तुम्हारे लिए तड़पा उसका क्या..?    जिसे तुमने प्यार किया वो तुमको मिले और जिस को तुम ना मिले उसका क्या..?

 जज़्बात-ए-इश्क़ सब को बताया नही जाता, लग जाता है दिल लगाया नही जाता.. जन्नत की बात हो या हो गुलिस्ताँ के रंग, दिल में लगी आग को बुझाया नही जाता ...!

 इश्क़ ने हमे बेनाम कर दिया, हर खुशी से हमे अंजान कर दिया, हमने तो कभी नही चाहा के हमे भी मोहब्बत हो, लेकिन आप की एक नज़र ने हमे नीलाम कर दिया 

 तनहाइयों मे मुस्कुराना इश्क़ है, एक बात को सब से छुपाना इश्क़ है, यूँ तो नींद नही आती हमें रात भर, मगर सोते सोते जागना और जागते जागते सोना इश्क़ है.

 इश्क़ ने हमे बेनाम कर दिया, हर खुशी से हमे अंजान कर दिया, हमने तो कभी नही चाहा के हमे भी मोहब्बत हो, लेकिन आप की एक नज़र ने हमे नीलाम कर दिया .

 हवाें सर्द चल रही है,कोई तूफान आने को है. हुस्न बैठा है पास मेरे, हमे इश्क़ होने को है.

 तेरी तस्वीर जब देखु,मुझ को याद आए तू, साँसों में,आहों में,धड़कन में मेरे है. जीना तेरे लिए,मरना तेरी खातिर, इश्क़ का सेहरा बंधा सर पर मेरे है.

 तेरी तस्वीर जब देखु,मुझ को याद आए तू, साँसों में,आहों में,धड़कन में मेरे है. जीना तेरे लिए,मरना तेरी खातिर, इश्क़ का सेहरा बंधा सर पर मेरे है.

 अजीब अंधेरा है ए इश्क़ तेरी मैफिल में किसी ने दिल भी जलाया तो रोशनी ना हुई

 वफ़ा का दरिया कभी रुकता नही, इश्क़ में प्रेमी कभी झुकता नही, खामोश हैं हम किसी के खुशी के लिए, ना सोचो के हमारा दिल दुःखता नहीं!

 हमने हमारे इश्क़ का, इज़हार यूँ किया, फूलों से तेरा नाम, पत्थरो पे लिख दिया

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 मंज़िल आसान नही ये तो इश्क़ का हसीन बेज़ार है. चल दिए जो कदम इस राह मे अब रोकना उसे ना गवार है. एक नाम लिया जाए दुनिया मे बड़े शान से इश्क़ की दुनिया मे हम भी थोड़े तो तज़ुर्बेकार है.

   चलना था तेरे साथ हूमें बनके तेरा हमसफर, आज हम अपनी ही परछाई से देखो कैसे डर गये, इश्क़ करना जुर्म था पर जुर्म हम तो कर गये, इश्क़ को खुदा समझ हम इश्क़ पे ही मर गये.

 हा मुझे आप से इश्क़ है यह बात अगर कह दी आप से तो रूठके इतना बैठे क्यो हो,

 ना जाने कितने घायल हो गये है, या इस नज़ारो के तीर ना चलाया कीजिए, खुदा के कहर से दर ज़ालिम, या ना इश्क़ मैं किसी को आजमाया कीजिए .

 फुरसत हो तुझे तो आ जाना.! जनाज़े पर अश्क़ बहा जाना.!! किया था इश्क़ इस ग़रीब से.! दुनियाँ को याद कर जाना.!!

 मेरी ज़िंदगी मैं आए हो बनके बाहर, अपने हाथो मैं तेरे नाम की लकीर बना लूँ बदली बनके बरस जा एक बार, अपने इश्क़ की मैं तुझको हीर बना लूँ .

 दिल को अपने आरमान मिल जाए, इस जिस्म को अपनी जान मिल जाए..!! आप जो मिल जाएँ मुझ को तो, इश्क़ को अपनी दास्तान मिल जाए..!!

 इश्क़ हो हमसे ही उनको ये ज़रूरी तो नही, एक जेसी हालत हो दोनो की ये ज़रूरी तो नही तन्हाईया मेरी सदा याद करती हे जिन्हे, ज़रूरत हो उनको भी मेरी ज़रूरी तो नही

 जाएँ भी तो कहाँ जाएँ, दिल इश्क़ में गिरफ्तार बोहत है..!! माँगते हैं सिर्फ़ मोहब्बत हम, तेरे लबों का इज़हार बोहत है..!!

 ए सनम दास्तान-ए-इश्क़ दिल मे छुपा लेता हूँ अब तो आलम है की दिल की ज़ुबान शब्दो.न मे भी संवार लेता हूँ

 इश्क़ में ना जाने कब हम हद से गुज़र गये, कई सारे ख्वाब मेरी आँखों में भर गये.

  भुला कर दर्द-ओ-गम ज़िंदगी के इश्क़ के खुमार में जी लेंगे , बसा कर मोहब्बत का आशियाना यादों के हिसार में जी लेंगे .

 तड़प के जब मेरे इश्क़ में तू रोना   चाहेगी है क़सम   तेरे सर की   हम   तुझे रोने   ना   देंगे

 शायरी को ग़ज़ल बना कर फरमाएँगे, और उनको मोहब्बत में बदल देंगे, जन्नत के खाव्ब भी आप भूल जाएँगे, जब इश्क़ को खुद एक इबादत बना देंगे

 कितनी खूबसूरत है यह ज़िंदगी जान लोगे तुम कभी इश्क़ की राहों से तुम गुज़र के देखो ना
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