Tuesday, 21 January 2020

Bewafa shayari


Bewafa shayari


वो हमसफ़र कैसे थे जो सफ़र छोड़ गये, बिना कसूर प्यार का रिश्तां तोड़ गये, वो कभी हमे याद करते नही, और खुद की याद मे हमको तड़पता छोड़ गये.


वफ़ा के नाम से वोह अनजान थे! किसी की बेवफाई से शायद परेशान थे! हमने वफ़ा देनी चाही तो पता चला! हम खुद बेवफा के नाम से बदनाम थे!

कभी किसी मुसाफिर से प्यार ना करना उनका ठिकाना बोहत दूर होता हैं वो कभी बेवफा तो नही होते, मगर उनका जाना ज़रूर होता हैं.


चाहते थे जिन्हे उनका दिल बदल गया समन्दर तो वही गहरा हे पर साहिल बदल गया कतल ऐसा हुआ किस्तो मे मेरा, कभी बदला खंजर तो कभी कातिल बदल गया.

True love bewafa shayari


करके वादा प्यार का वो मुकर गया, एक छोटे से तूफान से वो कितना दूर चला गया, हमे नही पता ये कैसी मजबूरी थी उनकी, या फिर इस प्यारे खिलोने से दिल भर गया.


किसी बेवफा ने मेरे दिल को तोड़ दिया, इसलिए हमने रास्ता मोड़ लिया, दिल की बात मत करना दोस्त, हमने तो प्यार करना ही छोड दिया.


तेरी बेवफ़ाई की हमे कोई फरियाद नही, क्या हुआ जो तू मुझे मिली नही, फिर भी हमारी यही दुआ है की, प्यार में, जो दर्द मिला है हमे, वो तुमको मिले नही.


कुछ पीते है नशा छाड़ाने के लिए कुछ पीते है गुम भुलाने के लिए  जाने क्यूँ दुनिया कहती है शराब को बुरा शराबी तो पिता है मुस्कुराने के लिए. :)



वो कितने बदल गये हे हालात की तरह, जब भी मिले वो हमे मुलाकात की तरह. हम भी क्या किसी के हुस्न का सौदा करते, ये ज़िंदगी भी मिली हे तो खैरत की तरह.


मिलना इत्तिफाक था, बिछड़ना नसीब था; वो उतना ही दूर चला गया जितना वो करीब था; हम उसको देखने क लिए तरसते रहे; जिस शख्स की हथेली पे हमारा नसीब था।


 साए ने साथ छोड़ दिया यार ने दिल तोड़ दिया,    अब तो खुदा भी मेरे खिलाफ हो गया,    जो प्यार का चिराग जलाया था मैने,    उसी चिराग से जलकर मैं खाक हो गया 



किसी आशिक़ ने क्या खूब कहा है. खामोशी को इकतियार कर लेना. अपने दिल को बेकरार कर लेना. ज़िंदगी का असली दर्द लेना हो तो किसी से बेपनाह प्यार कर लेना

Dardnak shayari


वापस ले लो वो सारी यादे, तड़प और आंसु, जुर्म कोई नही हे मेरा तो फिर ये सज़ा कैसी ?



समजते थे हम उनकी हर एक बात को, वो हर बार हमसे धोका देते थे, पर हम भी वक़्त के हातो मजबूर थे, जो हर बार उनको मौका देते थे.


दिल के दरिया मे ल़हेरो को उठाया ना करो, सपना बनके नींद चुराया ना करो, बहोत दर्द होता हे हमको यहा, आप सपना बनके हमे तडपाया न करो.


दिल टूटा तो एक आवाज आई! चीर के देखा तो कुछ चीज निकल आई! सोचा क्या होगा इस खली दिल में! लहू से धो कर देखा, तो तेरी तस्वीर निकल आई!



पलकों में आँसू और दिल में दर्द सोया है, हँसने वालो को क्या पता रोने वाला किस कदर रोया है, ये तो बस वोही जान सकता है, मेरी तन्हाई का आलम, जिसने ज़िंदगी में, किसी को पाने से पहले खोया हो.


ज़िंदगी के दर्द मे कोई अजनबी हमारा नही होता, अगर दिल प्यासा हो तो पानी से गुज़ारा नही होता. जब भी कोई देखे हमारी ये बेबसी, हम सबके हो जाते हे दुनिया मे, पर कोई हमारा नही होता.


जिनकी हसरत थी उनका प्यार ना मिला, जिनका बरसो इंतेज़ार किया उनका साथ ना मिला, अजीब खेल होते हे ये मोहब्बत के, किसी को हम ना मिले और कोई हमे ना मिला.

Dil tute shayari



किसी एक को दिल मे बसाना बुरा तो नही हे, किसी को दिल मे बसाना कोई ख़ता तो नही हे. अगर ज़माने की नज़र मे ये गुनाह हे तो, ज़माने वाले भी एक इंसान हे कोई खुदा तो नही.


 ज़िंदगी की आप क्या बाते करते हो, यहा तो हमारी मौत भी हमसे नाराज़ हे, हम ताज महाल क्यू बनवाए, यहा तो मेरी मुमताज़ ही एक बेवफा हे.



 मौत चाहते हे तो ज़िंदगी नाराज़ हो जाती हे, ज़हेर लेना चाहे तो वो दावा बन जाता हे, अब तू बता दोस्त हम क्या करे, जिनको भी चाहे वो बेवफा हो जाते हे.



 हर दिन हर पल मेरी साँसे ख़तम हो रही हे, मेरा जीवन मौत की दहलीज़ पे सो रहा हे, वो बेवफा से जाके मत पूछो मेरी मौत की वजह, वो तो सिर्फ़ दुनियावालो को दिखाने के लिए रो रही हे.     



 जब मजबूरी मे कोई जुदा होता हे, तब ज़रूरी नही की वो बेवफा होता हे, आपकी आँखो मे आँसू ओ को देखकर, चुप के से वो कही तुमसे ज़्यादा रोता हे.


 हँसी कि राह् में गम मिलें तो क्या करे, वफ़ा के नाम पर बेवफ़ा मिलें तो क्या करे. कैसे बचे ज़िंदगी में धोके बाजो से, कोई हँस के धोखा दे तो हम क्या करे.



 मोहब्बत करके देखि तो मोहब्बत को पहचान लिया, वफ़ा सिर्फ नाम कि बात हे ये सिर्फ बेवफाई का फ़साना हे.



 तेरे होने पर भी खुद को तनहा समझूँ में बेवफा हु के तुजे बेवफा समझूँ तेरी बेरुखी से वक़्त तो गुज़र गया हें मेरा यह खुद्दारी हें तेरी या तेरी अदा समझूँ तेरे बाद क्या हाल हुआ हें मेरा ये तेरी इनायत हें या समझूँ ज़ख़्म देती हो और मरहम भी लगाती हो यह तेरी आदत हें या तेरी अदा समझूँ


 आज आचनक तेरी याद ने हमको रुला दिया, क्या करे जो तुम ने मुजको भुला दिया, ना करते आपसे वफ़ा और ना मिलते ये सज़ा, मेरी हे वफ़ा ने तुज़े बेवफा बना दिया.



 बेवफ़ा कहने से क्या वो बेवफ़ा हो जाएगा तेरे होते इस सिफ़त का दूसरा हो जाएगा     

Dhadkan shayari


 आकाश मे डूबा एक प्यारा तारा हे, हमको तो किसी की बेवफ़ाई ने मारा हे, हम उनसे अब भी मोहब्बत करते हे, जिसने हमे मौत से भी पहेले मारा हे.


 मोहब्बत करे तो लगता हे जैसे, मौत से भी बड़ी ये एक सज़ा हे जैसे, किस किस से शिकायत करे हम, जब अपनी हे तक़दीर हे बेवफा हो.


 जब से एक बेवफा का हमारे दिल मे बसेरा हो गया, दिल तो दिल था पर मेरा साया भी हमसे दूर हो गया. भरोसा था प्यार से रोशन होगी ज़िंदगी मेरी, उस बेवफा ने ऐसा धोखा दिया के ज़िंदगीभर अंधेरा हो गया.



 तेरे होने पर भी खुद को तनहा समझूँ में बेवफा हु के तुजे बेवफा समझूँ.    तेरी बेरुखी से वक़्त तो गुज़र गया हें मेरा यह खुद्दारी हें तेरी या तेरी अदा समझूँ.    तेरे बाद क्या हाल हुआ हें मेरा ये तेरी इनायत हें या समझूँ.    ज़ख़्म देती हो और मरहम भी लगाती हो यह तेरी आदत हें या तेरी अदा समझूँ     



 आपके प्यार ने दिया सुकून इतना, के आपके सिवा ना कोई प्यारा लगे, बेवफ़ाई करनी हे तो इस तरह से करना, के आपके बाद कोई बेवफा ना लगे.


 मोहब्बत करे तो लगता हे जैसे, मौत से भी बड़ी ये एक सज़ा हे जैसे, किस किस से शिकायत करे हम, जब अपनी हे तक़दीर बेवफा हो.



 वफ़ा का नाम ना लिया करो, वफ़ा दिल को दुखती हे, हमसे वफ़ा का नाम लेते हे, एक बेवफा की याद आती हे.



 मोहब्बत करने वालो मे भी अक्सर ये सिला देखा हे, जिन्हे अपनी वफ़ा पे नाज़ था, उन्हे भी बेवफा देखा हे.



 सोचती हू इन सागर की लहरो को देखकर, क्यो वो किनारे से टकरा कर लौट जाती है, करती है ये किनारे से बेवफ़ाई, या सागर से वफ़ा निभाती है.

True love fail shayari


 निकलके उन्ही के दिल से हम महफ़िल मे आ बैठे हे, हमारी मुश्किल ये हे की बड़ी मुश्किल मे आ गये हे, लड़खड़ाने लगे हे पैर उनकी बेवफ़ाई की चोट से, पर लोग काहेते हे पी के सारी महफ़िल मे आ गये हे.


 आरजू थी की तेरी बाँहो मे, दम निकले, लेकिन बेवफा तुम नही,बदनसीब हम निकले.


 इश्क के इस दाग का एक बेवफा से रिश्ता है इस दुनिया में सदियों से आशिक का ये किस्सा है दर्दे-दिल की आग को कोई सागर क्या बुझाएगा दिलजला तो मौत के पहलू में जाकर ही बुझता है .


 बेवफा वो नही शायद हम ही खराब थे, ज़हर की ज़रूरत नही हम मर जाएँगे शराब से. कांटो का दर्द तो हमे महसूस ही नही हुआ, शायद बेपनाह प्यार था हमे उस नाज़ुक गुलाब से.


 पत्थर की पूजा कर बैठे हम अनजान थे, तुम्हारी हर आदत और बेवफ़ाई से नादान थे, तुम्ही ने बना दिया है हमे बेजान मूर्ति, वरना हम भी पहले किसी महफ़िल की जान थे..


 अगर मोहब्बत की तिजारत का इतना शोक़् है, ये बात भी जान लो वैसे , यहाँ वफ़ा का कोई मोल नही होता, और बेवफा बोहत अनमोल होता है..



 सितारो को रोशनी की क्या ज़रूरत, ये तो खुद को जला लेते हे, आशिक़ो को वफ़ा की क्या ज़रूरत, वो तो बेवफा को भी प्यार कर लेते हे   



 अब तो गम सहने की आदत सी हो गयी है रात को छुप - छुप रोने की आदत सी हो गयी है तू बेवफा है खेल मेरे दिल से जी भर के हूमें तो अब चोट खाने की आदत सी हो गयी है .     


 हमने अपनी सांसो पर उनका नाम लिख लिया..    नही जानते थे की हमने कुछ ग़लत किया..    वो प्यार का वादा हमसे करके मुकर गये..    खैर उनकी बेवफ़ाई से कुछ तो सबक लिया..!!


 हम तो जल गये उस की मोहब्बत में मोम की तरह... अगर फिर भी वो हमें बेवफा कहे तो उसकी वफ़ा को सलाम...



 तुमसे क्या शिकवा दोस्त बेवफ़ाई का. जब मुझसे मेरा नसीब ही रूठ गया. सच तो ये है दोस्त मे तो वो खिलोना हू. जो बदनसीब खेल ही खेल मे टूट गया.....


 मिले हज़ारों हमें, एक नया इल्ज़ाम सही गमो के समुंदर में गम का इनाम सही किसीने पागल कहा, किसी ने कहा दीवाना बेवफा जो नाम दिया, अब तो यही नाम सही


 ये कभी ना सोचा था तुमसे हमारी जूदा होगी तुमसे दिल लगाने की सज़ा तुम मुझे ऐसे दोगी हम तो आपकी वफ़ा पे ज़िंदा थे ये ना सोचा था कभी तुम सब से बड़ी बेवफा होगी


 उस बेवफा ने मुझे प्यार करके भी छोड़ दिया, मुझे अकेला कर तन्हाइयों से नाता मेरा जोड़ दिया, जब आई मौत अपनी तो उससे रहा ना गया, आया वो लाश पर मेरी ओर मुझे बिना जलाए ही छोड़ दिया

Dhadkan shayari


 जिसके ख़ुशी के खातिर हमने अपनोसे रिश्ता तोड़ दिया वो बेवफा अपने नए रिश्तो के खातिर हमसे ही मुँह मोड़ लिया .



 वो बेवफा हमारा इम्तेहा क्या लेगी   मिलेगी नज़रो से नज़रे तो अपनी नज़रे ज़ुका लेगी   उसे मेरी कबर पर दीया मत जलाने देना   वो नादान है यारो   अपना हाथ जला लेगी.



 तू भी तो आइने की तरह बेवफा निकला जो सामने आया उसी का हो गया 

Bewafa shayari

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